कुरल काव्य में स्पस्ट उल्लेख हैं :
उनका जीवन सत्य जो, करते कृषि उद्योग ,
और कमी अन्य की खाते बाकी लोग,
निज कर को यदि खींच ले कृषि से कृषक समाज ,
गृह त्यागी तब साधू के टूटे सर पर गाज,
जोंतों, नींदों खेत को क्दाद बड़ा परतवता
सींचे से रक्षा उचित , रखती अधिक महत्व ,
नहीं देखता भालता कृषि को रहकर गह,
गृहणी सम तब रूठती ,कृषि भी क्रश कर देह.
खेती में परिणाम जितने सरल रहते हैं उतने अन्य व्यवसाय में नहीं रहते हैं. अन्य धंधों में बगुले की तरह ध्यान रहता हैं , वह चुपचाप बैठा रहता हैं किन्तु उसका ध्यान सदा ग्राहक की और लगा रहता हैं . ग्राहक दिखा की वह उसके पीछे लगा इन धंधों में हजारों प्रकार का माया चार होता हैं . गृहस्थ गद्दी पर चुपचाप बैठे हुए ग्राहक का ध्यान करता हैं.बड़ी बड़ी गद्दी वाले मायाचार पूर्वक धन को लेते हैं . सोना चांदी के व्यापार में भी ऐसे भाव रहते हैं.
so if we will use more chemicals and pesticides our grains will be polluted and harmful for our health. farming is done for best intention. it has a welfare attitudes . so we pary/ respect to our mother land ie earth to grow more within your capacity. if we will apply forcefully force she will not be happy and will annoyed . really JAISA PIYOGE PAANI VAISEE HONGI BANI, JAISA KHAOGE ANNA VAISA HOGA MAN. now  a days expenses are more so there is less profit. if you save chemical , fertilizers prices soyou will be in profit. prayers/ requests/ submissions are must . and if you respect the paisa the paisa will take care of you. so now adopt the chemical free farming.

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