1एक नहीं दो दो मात्राये , नर से भारी नारी . नारी शब्द का अर्थ हैं न+आरी = नारी जिसका कोई शत्रु नहीं हैं.
 जो / मह यानी मंगलमय माहौल /महोत्सव जीवन में लाती हे, महिला कहलाती वह.
2महियानी धरती / ध्रती-धारनी जननी के प्रति ,
अपूर्व आस्था जगाती हैं /और पुरुष को रास्ता बताती हे ,
सही सही गंतव्य का-/महिला  कहलाती वह.
 जो / पुरुष -चित्त की वृत्ति को/विगत की दशाओं / और
अनागत की आशाओं से/ पूरी तरह हटाकर /अब यानी,
आगत -वर्तमान में लाती हैं /अबला कहलाती हैं वह….. अबला का एक अर्थ हैं , जो बाला को दूर रखे, वह अबला हैं.बाला का मतलब हैं समस्या -संकट.
३ घन घमन्ड नभ गर्जत घोरा, प्रिया हीन डरपत मन मोरा 
४ सुता यानी सु  का अर्थ सुहावनी ता प्रत्यय सुता बनता हैं. सुता मतलब सुख सुविधाओं का परम स्त्रोत सुता.
५ उभय कुल मंगल- वर्धिनी /उभय -लोक -सुख- सर्जिनी
स्व -पर- हित संपादिका /कहीं रहकर किसी तरह भी
हित का दोहन करती रहती /सो —-दुहिता कहलाती हैं.
६ माट्र  ७ अंगना 

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