यह है बिल में

– सभी अस्पतालों व चिकित्सा केंद्रों को निर्धारित न्यूनतम सुविधाएं मरीजों को मुहैया करानी होगी।

– अस्पतालों, चिकित्सा केंद्रों तथा प्रयोगशालाओं को अनिवार्य रूप से अपना पंजीयन कराना होगा।

– दुर्घटना या ऐसी ही परिस्थितियों में निजी अस्पताल आए मरीज का हर हाल में इलाज करना होगा।

– प्रदेश भर के स्पेशियलिटी और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का डाटा बनेगा।

– अस्पताल संक्रामक बीमारियों और उनसे ग्रस्त मरीजों का डाटा सरकार को देने के लिए बाध्य होंगे।

– एक्ट के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान। अपंजीकृत संस्था को देना होगा 50 हजार से पांच लाख रुपए तक जुर्माना।

..और ये भी

सबका वर्गीकरण होगा

बिल में सभी अस्पताल, नर्सिग होम, मेटरनिटी होम, डिस्पेंसरी, क्लीनिक को शामिल किया गया है। इन सभी ग्रामीण, शहरी, सरकारी और निजी संस्थानों का उपचार की पद्धति के आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा।

रिकॉर्ड रखना जरूरी

चिकित्सा संस्थानों को उपचार कराने वाले हर मरीज का रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, मेडिको लीगल रजिस्टर, रेडियोलॉजी और इमेजिंग से जुड़ीं जानकारियां रजिस्टर में दर्ज करनी होंगी।
मैं इस बात से हैरान हो रहा हू की हमारे डॉक्टर लोगों को इन नियमों के पालन करने में क्या परेशानी होती हैं. इससे इनकी कलि कमाई में रोक थम लग जाएँगी.सब कुछाइनकी मर्जी कहोना चाहिए, हम antarrashtriya  स्तर की व्यवष्ठ्सा में लगे हैं तो उस माप दंड के पालन में क्या परेशानी होती हैं.the physicians are cheating to the people for consultations, investigations and prescriptions of the medicines every where they are getting incentives, commissions. and hey have adopted nexus so they are entertain g and we are looted by them daily. they are not applying their minds, based on clinical reports and investigations. when there are no need of any investigations so they are compulsory.they have lost their moral duties.they are not following the ethics and also not possessing the qualities of the physicians as per the books. their aims are to earn more with cheating.
it is praise worthy to adopt the bill. or the welfare of the people.

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